Saturday, December 24, 2011

जिंदगी है की फिर भी प्यारी है

दिन परेशान है रात भारी है , जिंदगी है की फिर भी प्यारी है
क्या तमाशा है कबसे जारी है जिंदगी है की फिर भी प्यारी है

इस कहानी को कौन रोकेगा , उम्र ये सारी कौन सोचेगा
साथ काटी है या गुजारी है , जिंदगी है की फिर भी प्यारी है
...
रंगों से कहूँ लकीरों से कहूँ मैली मैली सी तस्वीरो से कहूँ
बेकरारी सी बेकरारी है , जिंदगी है की फिर भी प्यारी है

Wednesday, September 28, 2011

मेरा हिन्दुस्तां

जहाँ हर चीज है प्यारी
सभी चाहत के पुजारी
प्यारी जिसकी ज़बां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

... जहाँ ग़ालिब की ग़ज़ल है
वो प्यारा ताज महल है
प्यार का एक निशां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहाँ फूलों का बिस्तर है
जहाँ अम्बर की चादर है
नजर तक फैला सागर है
सुहाना हर इक मंजर है
वो झरने और हवाएँ,
सभी मिल जुल कर गायें
प्यार का गीत जहां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

जहां सूरज की थाली है
जहां चंदा की प्याली है
फिजा भी क्या दिलवाली है
कभी होली तो दिवाली है
वो बिंदिया चुनरी पायल
वो साडी मेहंदी काजल
रंगीला है समां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

कही पे नदियाँ बलखाएं
कहीं पे पंछी इतरायें
बसंती झूले लहराएं
जहां अन्गिन्त हैं भाषाएं
सुबह जैसे ही चमकी
बजी मंदिर में घंटी
और मस्जिद में अजां
वही है मेरा हिन्दुस्तां

कहीं गलियों में भंगड़ा है
कही ठेले में रगडा है
हजारों किस्में आमों की
ये चौसा तो वो लंगडा है
लो फिर स्वतंत्र दिवस आया
तिरंगा सबने लहराया
लेकर फिरे यहाँ-वहां
वहीँ है मेरा हिन्दुस्तां

Wednesday, July 13, 2011

माँ

लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती,
बस एक माँ है जो कभी खफ़ा नहीं होती।

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं
मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ।

Saturday, June 25, 2011

शायरी

न कत्ल करते हैं, न जीने की दुआ देते हैं,
लोग किस जुर्म की आखिर ये सज़ा देते है ।
****
यूं तो मंसूर बने फिरते हैं कुछ लोग,
होश उड जाते हैं जब सिर का सवाल आता है ।
****
मुझे तो होश नही, तुमको खबर हो शायद ,
लोग कहते है कि तुम ने मुझ को बर्बाद कर दिया ।
****
आखिर काम कर गए लोग ,
सच कहा और मर गए हम लोग ।
****
बस्ती मे सारे लोग लहू मे नहा गए,
लह्ज़ा नए खीताब का कितना अजीब था ।
****
देखिए गौर से रुक कर किसी चौराहे पर,
जिंदगी लोग लिए फिरते हैं लाशों के तरह ।
****
इस नगर मे लोग फिरते है मुखौटे पहन कर,
असल चेहरों को यहां पह्चानना मुमकिन नही ।
****
कुछ लोग ज़माने ऐसे भी तो होते हैं ,
महफिल में जो हंसते हैं, तन्हाई मे रोते हैं ।

Monday, June 13, 2011

कौन हूँ मैं

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झूठ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो दूर हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,

Saturday, June 11, 2011

ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो.
रात काली सही कोई गम न करो|
एक सितारा बनो जगमगाते रहो.
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो||
बांटनी है अगर बाँट लो हर ख़ुशी
गम न ज़ाहिर करो तुम किसी पर कभी|
दिल कि गहराई में गम छुपाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो||
अश्क अनमोल है खो न देना कहीं.
इनकी हर बूँद है मोतियों से हसीं|
इनको हर आंख से तुम चुराते रहो.
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो||
फासले कम करो दिल मिलाते रहो.
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो||||

Sunday, June 5, 2011

देश

मिल कर लूट खसोट रहे सब , क्या "पवार" क्या "नीरा" ...

सारे देश की नसबंदी कर दी , बिन टांका बिन चीरा...



देश जाय जहन्नुम में ..या कोई जिए बदहाली में ..
...

माई दादा देख रहे मैच किरकेट का मोहाली में



मन्नू को दिखी नेकनीयत युसूफ रजा गिलानी में ..

बस किरकिट ही किरकिट बचा गली मोहल्ला खलिहानी में



जांघिये में पैबंद लगी ..नाडा नहीं पैजामी में

फिर भी नाच रहा मस्त मंगरुआ ..अपनी ही नादानी में ..



कल तक पियाज पेट्रोल का रोना रो रहे थे कंगाली में

पेप्सी कोक के खेल में उलझे ..रोटी नहीं है थाली में ..



शायद सब भूले कैसे अरबो खाए रजा और कलमाडी ने..

प्यार

राज़ गहरा है
जुबाँ पे पहरा है

मन की आँखों के बगैर
नज़र आता नहीं

कीमत चूका नहीं सकते
मुफ्त पा नहीं सकते

ना हो तो मुसीबत
हो जाये तो परेशानी

मिल जाये तो मिट्टी है
खो जाये तो सोना है

ये प्यार भी क्या बला है
कह भी नहीं सकते
रह भी नहीं सकते

Tuesday, May 24, 2011

मोहब्बत

जिसे हमेशा सच बोलने की आदत थी,वो मेरे हर झूठ से खुश होती थी|
जिसे तन्हाई में रोने की आदत थी,वो एक आंसू भी गिरने पर खफा होती थी||
वो कहती थी की मुझे भूल जाओगे, जिसे मेरी हर बात याद रखने की आदत थी|
हमेशा माफ़ी मांगने के बहाने से, रोज़ गलतियाँ करना उसकी आदत थी||
वो जो दिल जान न्योछावर करती थी मुझ पर, मगर छोटी सी बात पर रूठना उसकी आदत थी|
हम उसके साथ चल दिए पर ये नहीं जानते थे,रास्ते में ही छोड़कर उन्हे जाने कि आदत थी||
पता नही था की वो हमें जिंदगी की राह छोड़ जायेगे, जिन को हमारे साथ चलने की आदत थी||||

Friday, April 29, 2011

कल ये हों ना हों

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

क्या पता
कल हो ना हो

Thursday, April 7, 2011

दोस्त

खुशी भी दोस्तो से है,
गम भी दोस्तो से है,

तकरार भी दोस्तो से है,
प्यार भी दोस्तो से है,

रुठना भी दोस्तो से है,
मनाना भी दोस्तो से है,

बात भी दोस्तो से है,
मिसाल भी दोस्तो से है,

नशा भी दोस्तो से है,
शाम भी दोस्तो से है,

जिन्दगी की शुरुआत भी दोस्तो से है,
जिन्दगी मे मुलाकात भी दोस्तो से है,

मौहब्बत भी दोस्तो से है,
इनायत भी दोस्तो से है,

काम भी दोस्तो से है,
नाम भी दोस्तो से है,

ख्याल भी दोस्तो से है,
अरमान भी दोस्तो से है,

ख्वाब भी दोस्तो से है,
माहौल भी दोस्तो से है,

यादे भी दोस्तो से है,
मुलाकाते भी दोस्तो से है,

सपने भी दोस्तो से है,
अपने भी दोस्तो से है,

या यूं कहो यारो,
अपनी तो दुनिया ही दोस्तो से हैं|

Wednesday, March 23, 2011

मै तुमको तुमसे चुरा लेता हूँ.

कैसा हूँ मै ,
क्यों हूँ मै ऐसा ......
मै कोई चोर तो नहीं......
फिर भी मै तुमको तुमसे चुरा लेता हूँ....
जब तुम कर रही होती हो कुछ काम...
मै पास खडा तुम्हारी खुशबु चुरा लेता हूँ...
बीच-२ तुम्हे हलके से छू कर...
तुम्हारा अहसास चुरा लेता हूँ...
तुम्हारे लबो से हंसी की खनखनाहट ...
मै अपने कानो के अंदर समा लेता हूँ......
तुम्हारी आँखों की चंचल शोखी.....
अपनी आँखों में बसा लेता हूँ...
मै तुमको तुमसे चुरा लेता हूँ..
क्यों करता हूँ मै ऐसा...
क्या होगा इस से.....
इसका भी राज़ बता देता हूँ..
जब भी दूर होती हो मुझसे...
अकेलापन नहीं होता गवारा..
तब तुम्हारी इन चुराई चीजों से...
मै अपना मन बहला लेता हूँ
इसलिए जब भी होती हो पास मेरे
मै तुमको तुमसे चुरा लेता हूँ..

Wednesday, March 16, 2011

होली


होली की ऋतू आई है ।
रंग गुलाल लायी है ।।
मुख में गुलाल हाँथ में रंग ।
होली खेलो सबके संग ।।
द्वेष भावना भूलकर ।
गुझियों का लो सब आनन्द।।
रंग से रहा न कोई डर ।
झूम रहे सब गीतों पर ।।
मिलाके ठंडाई में भांग ।
सब नांचे गांए संग संग ।।
लेके पिचकारी हांथों में ।
गलिन-गलिन सब घूम रहे ।।
कपड़े रंगे, रंगे चौबारे ।
कुछ जन लगे सफ़ाई में ।।
गोरे गोरे गाल हुए है लाल ।
रंग लोटा भरि-भरि डाल ।।
देखों होलीं का कमाल ।
चारों तरफ फैला रंग और गुलाल ।।

होली की हार्दिक शुभकामनाये !!!!!

Thursday, March 3, 2011

निक्का बच्चा

ओ वक़्त बड़ा ही अछा सी ,
जदों मैं निक्का बच्चा सी,
गोलियाँ-टोफिया खानदा सी,
छोटियां निकरां पन्दा सी,
ओदो सस्ता बड़ा पेट्रोल सी,
पर साइकिल मेरे कोल सी ,
ना कुड़ियां दा कोई ज़िक्र सी,
मेनू पढाई दी बस फ़िक्र सी,
ना facebook ते status लिखदा si
जदों यार सारे मेरे नाल सी,
ओदों वक़्त ने बदली चाल सी,
स्कूल छड,आये कॉलेज विच,
क्योंकि ज़िन्दगी दा सवाल सी,
हुन ग्रुप विच रहना पैंदा है
सॉरी-थान्क्यु केना पैंदा है,
पर फेर वी यार मेरे पुछदे ने,
तू कल्ला-कल्ला क्यूँ रहंदा है
मैं जवाब नहीं दे पेंदा हाँ
बस चुप-चाप रह जांदा हाँ
फिर अथरू पूंज केंदा हाँ
तुस्सी सारे जाओ,मैं आंदा
सब पुछदे की वजह दिल सख्त दी
मैं क्या,याद आ गयी उस वक़्त दी
जो वक़्त बड़ा ही अच्छा सी
जदों मैं निक्का बच्चा सी

Monday, February 21, 2011

प्यार

नींद आती है नही, चैन खो जाता है |
प्यार में सभी के साथ ऐसा हो जाता है ||
दिल करता हैं की उनसे मिले बार बार |
दिल हर वक्त करता है उन्ही का इंतजार ||
यही है प्यार....
उनकी आवाज कानों में बस जाती है |
हर तरफ उनकी झलक नजर आती है ||
हर पल जवां पर उनका ही नाम होता है |
तन्हां तन्हाई में ऐसा ही होता है ||
दिल उनका दीवाना हो जाता है |
सारी दुनिया से बेगाना हो जाता है ||
मदहोसी छाई होती है |
जिन्दगी उनकी परछाई होती है ||
तीर नजर दिल के पार हो जाता है |
प्यार ही दिल की कहानी का सार हो जाता है |
दस्ती है तन्हाई , चुभती है है परछाई |
पहले नाम उनका बाद में यद् आतें है साईं |
उनके बिन एक भी पल दिल नइयो लगदा |
मरने का या जीने का दिल नइयो करदा||
उनकी नजरें इनायत जब हो जाती है |
हमारी आँखों से नींद खो जाती है ||

Monday, February 7, 2011

प्रेमज्ञान

प्रेमज्ञान दिया जिसने! स्वाभिमान दिया जिसने! मैं गिरा भी अगर तो, दामन थाम लिया जिसने!
पर वही शख्स मुझको भुलाने लगा है! वादा था उम्र भर का पर वो जाने लगा है!
तकलीफ में हूँ लेकिन मैं कह नहीं सकता! हाँ ये सच है के बिन उसके मैं रह नहीं सकता!
आत्मज्ञान दिया जिसने! आत्मसम्मान दिया जिसने! रात में डरने पर, हाथ थाम लिया जिसने!
पर वही शख्स मुझको मुझे तन्हा बनाने लगा है! मेरे शब्दों को मेरे खतों को जलाने लगा है!
उदास हूँ पर बनके अश्क मै बह नहीं सकता! हाँ ये सच है के बिन उसके में रह नहीं सकता!
गुणगान दिया जिसने! बलिदान दिया उसने! मेरी उदासी में, चेहरा थाम लिया जिसने!
पर वही शख्स मुझको मज़बूरी बताने लगा है! नहीं होगा मिलन ये दर्पण दिखाने लगा है!
बेबस हूँ "देव", लेकिन मैं कह नहीं सकता! वो खुदा है, बे-इबादत मैं रह नहीं सकता!!!!

Sunday, February 6, 2011

विरह की बेबसी

"अब आ भी जाओ,ये तन्हाई रुलाती है हमें !
विरहा में सर्द हवा और सताती है हमें !
तड़प के-डर से, तेरे खवाबों से बचना चाहा!
नींद में घेर न लें, रात भर जगना चाहा!
...बंद दरवाजा, फिर खिड़की पर परदे ढक कर ,
पलक दबाने को उनपर हाथ जो रखना चाहा!
बस यही बात तो अग्नि में जलाती है हमें!
हाथ की अंगूठी तेरी याद दिलाती है हमें!

अब आ भी जाओ,ये तन्हाई रुलाती है हमें.............................

तड़प के डर से ये, काम भी करना चाहा!
धोये कपड़े,तो कभी गेंहू फटकना चाहा!
काम निबटाये, पानी भरके फिर नहाकर के,
सुखाके बाल, भीगे वस्त्र बदलना चाहा!
बस यही बात तो लज्जा में डूबाती है हमें!
उनकी तस्वीर आईने में, नज़र आती है हमें!


अब आ भी जाओ,ये तन्हाई रुलाती है हमें.............................

तड़प के डर से चेहरा भी पलटना चाहा!
भागकर, दौड़कर कमरे से निकलना चाहा!
धूप की आंच में कपड़ो को सुखाने के लिए,
मैंने सीढ़ी से अपनी छत्त पर पहुंचना चाहा!

"देव" ये बात तो लज्जा में डुबाती है हमें!
उनकी चिठ्ठी लिए, मेरी सास बुलाती है हमें!


"" प्रेम के लिए किसी इंसान का प्रत्यक्ष होना जरुरी नहीं, प्रेम तो परोक्ष रूप से भी किया जाता है! तो आइये विरह के इन नाजुक लम्हों की प्राप्ति को प्रेम करैं.

Saturday, February 5, 2011

दोस्ती

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,

कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "भगवान" है दोस्ती .........

Monday, January 31, 2011

यादें

उसके बिना चुपचाप रहना अच्छा लगता है,

ख़ामोशी से एक दर्द को सहना अच्छा लगता है,,

जिस प्यार की याद में निकल पड़ते है आसू,

पर सामने उसके कुछ न कहना अच्छा लगता है,,

मिल के उससे बिछड़ न जाये बस यही दुआ करते है हर पल,

इसलिए कभी कभी उनसे दूर रहना अच्छा लगता है,,

जी चाहता है साडी खुशिया लेकर उनकी झोली में भर दू,

बस उनके ही प्यार में सब कुछ खोना अच्छा लगता है,,

उनका मिलना न मिलना तो किस्मत की बात है,

पर पल पल उसकी याद में रोना अच्छा लगता है,,

उसके बिना ये सारी खुशिया अजीब सी लगती है,

पर हमें तो रो रो के उसकी याद में जलना अच्छा लगता है|

प्यारा बंधन

आप आदर्श है हमारे, हम आपको चाहते है.
प्यार करते है आपसे ,आप जैसा बनाना चाहते है..
आप सदा इस दुनिया में आबाद रहे.
कोई बंधन न हो दुखो का, आप आजाद रहे..
हम तो सजदा करते है , खुदा से दिन रात यही.
न करे मुझको कोई, आपसे जुदा कभी..
आंसू होते है आँखों में, काँटों सी चुभती बातें .
जब याद आती है, वो गुजरी हुयी यादें .
आपने किया बह काम जो दुनिया न कर सकी ..
कर्तब्यो का निरबाह आपकी मिसाल बन गयी.
आपका प्यार मिला जिन्दगी संबर गयी..
कहता है "देव" आज अपनी जुबान से ..
सहारा बनूँ आपका, काम आऊ आपके...

Thursday, January 20, 2011

प्रेम

"ढाई आख़र प्रेम के पता नहीं, फिर प्रेम की भाषा क्यूँ?
हिम्मत नहीं है दिल में, फिर प्रेम की अभिलाषा क्यूँ?
प्रेम में होता है समर्पण, प्रेम में होती हैं प्रार्थनायें!
प्रेम में होता है यकीन, प्रेम में होती हैं कामनायें!
छोड़ते हो किसी को, तो फिर यह जिज्ञासा क्यूँ?
...
प्रेम में होती है जरुरत, प्रेम में होती हैं भावनायें!
प्रेम में होता है अस्तित्व, प्रेम में होती हैं रचनायें!
तोड़ते हो किसी का दिल, तो फिर यह आशा क्यूँ?


प्रेम के बिन बड़ी कठिनता, प्रेम के बिन हैं समस्याएँ!
प्रेम के बिन बड़ी नीरसता, प्रेम के बिन हैं दुखद्तायें!
"देव" मुंह मोड़ते हो किसी से,तो फिर यह हताशा क्यूँ?


ढाई आख़र प्रेम के पता नहीं, फिर प्रेम की भाषा क्यूँ?
हिम्मत नहीं है दिल में, फिर प्रेम की अभिलाषा क्यूँ?

Wednesday, January 12, 2011

मोहब्बत

जो आपने न लिया हो, ऐसा कोई इम्तहान न रहा,
इंसान आखिर मोहब्बत में इंसान न रहा,
है कोई बस्ती, जहा से न उठा हो ज़नाज़ा दीवाने का,
आशिक की कुर्बत से महरूम कोई कब्रस्तान न रहा,

हाँ वो मोहब्बत ही है जो फैली हे ज़र्रे ज़र्रे में,
न हिन्दू बेदाग रहा, बाकी मुस्लमान न रहा,

जिसने भी कोशिश की इस महक को नापाक करने की,
इसी दुनिया में उसका कही नामो-निशान न रहा,

जिसे मिल गयी मोहब्बत वो बादशाह बन गया,
कुछ और पाने का उसके दिल को अरमान न रहा,

Saturday, January 8, 2011

अजीब है ना

अजीब है ना! १०० रूपिये का नोट बहुत ज़्यादा लगता है जब “गरीब को देना हो”, मगर होटल में बैठे हो तो बहुत कम लगता है.... ३ मिनट भगवान को याद करना बहोत मुश्किल है, मगर ३ घंटे की पिक्चर फिल्म देखना बहोत आसान....... पूरे दिन मेहनत के बाद जिम जाना नहीं थकाता, मगर जब अपनेही माँ-बाप के पैर दबाने हो तो लोग तंग आ जाते है..... वैलेंटाइन डे को २०० रूपियों का बुके ले जाएंगे, पर मदर डे को १ गुलाब अपनी माँ को नहीं देंगे....... इस मेसेज को फॉरवर्ड करना बहुत मुश्किल लगता है, जब की फिजूल जोक्स को फॉरवर्ड करना हमारा फर्ज़.......

Friday, January 7, 2011

उन हसीनों में

रची है रतजगो की चाँदनी जिन की जबीनों में.
"क़तील" एक उम्र गुज़री है हमारी उन हसीनों में..
वो जिन के आँचलों से ज़िन्दगी तख़लीक होती है.
धड़कता है हमारा दिल अभी तक उन हसीनों में..
ज़माना पारसाई की हदों से हम को ले आया.
मगर हम आज तक रुस्वा हैं अपने हमनशीनों में..
तलाश उनको हमारी तो नहीं पूछ ज़रा उनसे.
वो क़ातिल जो लिये फिरते हैं ख़ंज़र आस्तीनों में..