Friday, May 31, 2013

कल ये हों ना हों

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो..

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो....

Friday, May 10, 2013

चाँद


अगर चाँद असमान से उतरे तो आम हो जाये,
तेरे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाये,
अजब हालात हुए की दिल का सौदा हो गया,
मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाये,
मैं खुद भी तुझसे मिलने की कोशिश नहीं करूँगा,
क्योंकि नहीं चाहता कोई मेरे लिए बदनाम हो जाये,
उजाले अपनी यादों के मेरे साथ रहने दो,,,,
जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाये !!

कोई पैगाम नहीं





कोई पैगाम नहीं ......
जो गुजर गयी उसकी क्यों शाम नहीं......
लाख तदबीर की दर्द-ए-दिल को क्यों आराम नहीं ......
मेरे नाम से क्यों तू गुमनाम नहीं ....
हर शक्श की किस्मत मै क्यों इनाम नहीं .....
माना दिल के अहसासों का कोई दाम नहीं ....
पर मेरी कहानी मै अब क्यों तेरा नाम नहीं ....
मुझे डर है आरज़ू न तेरी मिट जाये “शमा”....
कई दिनों से तेरा कोई पयाम, कोई पैगाम नहीं ......